Tag: shayari

  • देखो

    देखो

    मेरी प्यास से सूखे हुए चेहरे की दरारें नहीं,
    आँखों में पानी को चाहने की जद्दोज़हद देखो।




  • “क्या से क्या बन गए” – Poem

    टूट कर बिखरे हुए उम्मीद की मेरी,
    कंकड़ ये कांच के हैं अब नासूर बन गए।

    जिस इबादत के नशे में धुत था मैं कामिल,
    उस ख़ुदा के अश्क साझा शौक बन गए।

    वक़्त ही मरहम है, दिल के घाव गहरे हैं,
    कुछ रश्क भरी हैं ख्वाहिशें, जिन पर सब पहरे हैं।

    दरख़्त-ए-दिल की शाखों में जितने घरोंदे थे,
    मुफलिसी की हर परिंदे के फरमान बन गए।

    हम फ़ेहरिस्त-ए-आरज़ू पर दर्ज़े के अव्वल थे,
    ज़िद से नाकारा आशिको में नाम कर गए।।