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  • देखो

    देखो

    मेरी प्यास से सूखे हुए चेहरे की दरारें नहीं,
    आँखों में पानी को चाहने की जद्दोज़हद देखो।




  • “हमरास्ता” – Poem

    “हमरास्ता” – Poem

    हर दो कदम पर ठिठक कर, आस पास नज़रें घुमाता हूँ।
    दूर किसी राह पर कोई साया दिखे,
    तो मुँह मोड़ कर इमारतों के जंगलों में गायब हो जाता हूँ।
    पक्के रास्तों से कभी बनी नहीं,
    कच्ची राहों में वो नमी नहीं।
    जहां कदम चले, वहीं आगे बढ़ जाता हूँ।

    भटक जाता हूँ अपने आप को खोजने की कवायद में,
    मेरे रास्ते पर चलने वाले ज़मीं पर निशाँ नहीं छोड़ते।