ABSINRAW
Parallel Perspectives | Senseless Rantings | Different, Little Things
Category: कविताएँ
इस श्रेणी में हम हिंदी भाषा में रंगीन और महसूसी कविताओं को साझा करेंगे। यहाँ अलंकार, भावनाओं, और विचारों का खेल बयां होता है जो शब्दों के माध्यम से जीवन की सच्चाई को परिपूर्ण करते हैं। इस कविता की दुनिया में आकर आप भावों के साथ साथ भावनाओं को भी महसूस करेंगे। चाहे वह प्रेम की बात हो या जीवन के ताल्लुकात, यहाँ आपको हर वह कवितायेँ मिलेगी जो आपके दिल को छू जाने और सोच पर गहरा प्रभाव छोड़ने की चेष्टा करेंगी।
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कौन है वहां? उस पार सड़क केशीशों से बनी एक इमारत, फिर भी हर मंजिल घिरी अंधेरों मेंरोशनी सी है बल्ब की शायद, झांकती बड़ी मुश्किल सेफंसी लगती है पर्दों में, या उलझी खिड़की की उन लड़ियों में कौन है वहां? क्यों? इस वक्त क्या कर रहा है?जागा हुआ है, या रात के आगोश में…
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आज रविवार है। छुट्टी का दिन है। इसलिए थोड़ा आलस लाज़मी है। मस्त मटन बनाएंगे दोपहर में और खाकर सुस्ताएंगे। सर्दी की भीनी-भीनी धूप का लुत्फ उठाएंगे। आप भी थोड़ा अल्सियाइये, और बस इन दो पंक्तियों से काम चलाइए। कि ग़म का तो ढिंढोरा भी पीट लूं सड़क पर,कोशिश कर के देखा है, नज़र ही…
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This poem drives its motivation from the toxicity that can be found in friendships, but is seldom identified and talked about.
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मेरी प्यास से सूखे हुए चेहरे की दरारें नहीं, आँखों में पानी को चाहने की जद्दोज़हद देखो।
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हर दो कदम पर ठिठक कर, आस पास नज़रें घुमाता हूँ। दूर किसी राह पर कोई साया दिखे, तो मुँह मोड़ कर इमारतों के जंगलों में गायब हो जाता हूँ। पक्के रास्तों से कभी बनी नहीं, कच्ची राहों में वो नमी नहीं। जहां कदम चले, वहीं आगे बढ़ जाता हूँ। भटक जाता हूँ अपने आप…