Category: कविताएँ
इस श्रेणी में हम हिंदी भाषा में रंगीन और महसूसी कविताओं को साझा करेंगे। यहाँ अलंकार, भावनाओं, और विचारों का खेल बयां होता है जो शब्दों के माध्यम से जीवन की सच्चाई को परिपूर्ण करते हैं। इस कविता की दुनिया में आकर आप भावों के साथ साथ भावनाओं को भी महसूस करेंगे। चाहे वह प्रेम की बात हो या जीवन के ताल्लुकात, यहाँ आपको हर वह कवितायेँ मिलेगी जो आपके दिल को छू जाने और सोच पर गहरा प्रभाव छोड़ने की चेष्टा करेंगी।
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जो जल रहा था धुआं-धुआं,बारिश भी उसके नसीब में इथेनॉल मिले पेट्रोल की ही थी।पानी की यहाँ ज़रा किल्लत रहती है।
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अंत का अंतिम पहर ठहर गया,वक़्त का ढहता साँचा संभल गया,हर विधि का विधान बदल गया,आज आखिरकार मेरा खोटा सिक्का चल गया.
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कौन है वहां? उस पार सड़क केशीशों से बनी एक इमारत, फिर भी हर मंजिल घिरी अंधेरों मेंरोशनी सी है बल्ब की शायद, झांकती बड़ी मुश्किल सेफंसी लगती है पर्दों में, या उलझी खिड़की की उन लड़ियों में कौन है वहां? क्यों? इस वक्त क्या कर रहा है?जागा हुआ है, या रात के आगोश में…
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आज रविवार है। छुट्टी का दिन है। इसलिए थोड़ा आलस लाज़मी है। मस्त मटन बनाएंगे दोपहर में और खाकर सुस्ताएंगे। सर्दी की भीनी-भीनी धूप का लुत्फ उठाएंगे। आप भी थोड़ा अल्सियाइये, और बस इन दो पंक्तियों से काम चलाइए। कि ग़म का तो ढिंढोरा भी पीट लूं सड़क पर,कोशिश कर के देखा है, नज़र ही…
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This poem drives its motivation from the toxicity that can be found in friendships, but is seldom identified and talked about.